पहले पेयजल व्यवस्था चुनौती, अब हर दिन राहत का जल
- 2.25 करोड़ रुपये की परियोजना ने बदली ग्रामीण पेयजल व्यवस्था की तस्वीर
- 9,843 लोगों को मिल रहा नियमित पेयजल

25 Sep, 2026


किसी भी गांव के लिए नियमित पेयजल केवल सुविधा नहीं बल्कि जीवन की बुनियादी जरूरत है। जब पेयजल व्यवस्था सुचारू हो तो इसका सीधा असर ग्रामीण जीवन पर दिखाई देता है। बानसूर क्षेत्र के नारायणपुर, ज्ञानपुर, मुण्डावर, बिलाली, रतनपुरा/कराना, गढ़ी, बामनवास कांकर और बड़ागांव सहित संबंधित ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए किए गए कार्य इसी बदलाव की कहानी बयां करते हैं।

पहले - पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने की जरूरत—

इन ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने और आवश्यक सुधार लाने की आवश्यकता महसूस की गई। क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नए जलस्रोत विकसित करने, पाइपलाइन बिछाने तथा अन्य जरूरी कार्यों की योजना तैयार की गई। उद्देश्य था कि उपलब्ध संसाधनों को मजबूत करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधा को बेहतर बनाया जा सके।

मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा ने बजट घोषणा संख्या 212-01-00 के अंतर्गत इस दिशा में 2.25 करोड़ रुपये की लागत से कार्य स्वीकृत किए गए। योजना में 10 नलकूपों के निर्माण, पाइपलाइन बिछाने तथा अन्य आवश्यक कार्यों को शामिल किया गया।

फिर - योजना बनी, काम शुरू हुआ और लक्ष्य हासिल हुआ—

इस परियोजना के लिए 10 नवम्बर 2025 को कार्यादेश जारी किया गया। इसके बाद नलकूप निर्माण, पाइपलाइन बिछाने और पेयजल व्यवस्था में सुधार से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया गया। विभागीय प्रयासों से परियोजना का कार्य 20 मई 2026 को पूर्ण कर लिया गया। समयबद्ध रूप से पूरा हुआ यह कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बना।

अब - नियमित पेयजल से बदली तस्वीर—

कार्य पूर्ण होने के बाद संबंधित ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। योजना के माध्यम से अब संबंधित क्षेत्रों के ग्रामीणों को नियमित रूप से पेयजल सुविधा का लाभ मिल रहा है। इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रमाण है इससे लाभान्वित होने वाली आबादी - 9,843 लोग। नलकूपों के निर्माण और पाइपलाइन से जुड़े कार्यों ने ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को आवश्यक आधार प्रदान किया है और लोगों तक पेयजल सुविधा की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।

2.25 करोड़ की लागत, 9,843 जीवनों तक पहुंचा बदलाव—

यह परियोजना केवल नलकूपों और पाइपलाइन के निर्माण तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास साबित हुई है। योजना के पूरा होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था में आया सुधार बताता है कि सही योजना, समयबद्ध क्रियान्वयन और आवश्यक आधारभूत ढांचे के विकास से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधा को प्रभावी बनाया जा सकता है।

आज, जहां पहले पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने की जरूरत थी, वहीं अब 9,843 ग्रामीण नियमित पेयजल सुविधा का लाभ ले रहे हैं। 2.25 करोड़ रुपये की लागत से पूरा हुआ यह कार्य ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने और लोगों तक नियमित पेयजल पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में सामने आया है।

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मानसिंह/ब्रजेश